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सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, हिमाचल में 75 से कम छात्र वाले 10 कॉलेज होंगे मर्ज; स्टूडेंट को मिलेगा हर महीने 5000 रुपये

हिमाचल सरकार ने 75 से कम छात्रों वाले 10 सरकारी कॉलेजों का विलय कर दिया है। दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों को दूसरे कॉलेज में दाखिला लेने पर 5000 रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलेगा।

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||3 min read|Updated 1 month ago
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सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, हिमाचल में 75 से कम छात्र वाले 10 कॉलेज होंगे मर्ज; स्टूडेंट को मिलेगा हर महीने 5000 रुपये

राज्य ब्यूरो, शिमला। 75 से कम विद्यार्थियों की संख्या होने पर राज्य सरकार ने 10 सरकारी कॉलेजों को मर्ज कर दिया है। इन कॉलेजों में दूसरे व तीसरे वर्ष में अध्ययनरत्त विद्यार्थियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार न पड़े इसके लिए सरकार ने स्टाइपेंड देने का निर्णय लिया है। प्रत्येक विद्यार्थी को 5 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलेगा।


जिन कॉलेजों के साथ इन्हें मर्ज किया गया है उनमें दाखिला लेने पर ही स्टाइपेंड मिलेगा। अन्य किसी कालेज में दाखिला लेने पर यह सुविधा नहीं मिलेगी। निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग डॉ. हरीश कुमार की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।


उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसवार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन कॉलेजों में नए दाखिले नहीं होंगे। जिन कॉलेजों को बंद किया गया है उनमें टिक्कर, भलेई, कुकुमसेरी, कुपवी, संधोल, मुल्थान, जैनगर, ननखड़ी, रोनहाट और कोटली डिग्री कालेज शामिल हैं।


निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग ने संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि प्रथम वर्ष सहित किसी भी कक्षा में नए प्रवेश न लिए जाएं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. हरीश कुमार ने सभी संबंधित कॉलेज प्राचार्यों को दूसरे और तीसरे वर्ष के विद्यार्थियों की विशेष काउंसलिंग करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नए संस्थानों में प्रवेश, विषय चयन और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराना है।


एक साल से लटका था निर्णय

राज्य सरकार ने बीते वर्ष यह निर्णय ले लिया था। इस का उस वक्त इसलिए विरोध हुआ था क्योंकि सत्र चला हुआ था। सरकार के फैसले को कोर्ट में चुनौती न मिले इसके लिए इसे लागू नहीं किया गया था। अब नया सत्र शुरू हो रहा है तो सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।


सरकार के इस निर्णय को लेकर कई सवाल भी उठने लगे हैं। अब तक छात्र अपने घरों के निकट स्थित कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन विलय के बाद उन्हें जिला मुख्यालयों तक जाना होगा। इससे आवास, परिवहन और अन्य खर्च बढ़ेगा। हालांकि सरकार का तर्क है कि स्टाइपेंड इसके लिए ही दिया जा रहा है।


लाहुल-स्पीति जिले के कुकुमसेरी कॉलेज के विद्यार्थियों पर इस फैसले का सबसे अधिक असर पड़ सकता है। उन्हें अब आगे की पढ़ाई के लिए कुल्लू जाना होगा। इसके अलावा, इन कॉलेजों के लिए करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित भवनों और आधारभूत ढांचे के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम संसाधनों के बेहतर उपयोग और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से उठाया गया है।

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