CEO का अल्टीमेटम भी बेअसर! नोएडा के सेक्टरों में बदहाल सड़कें दे रही हैं हादसों को न्योता

रितिक गुप्ता , नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के दावों, बैठकों और चेतावनियों की पोल शहर की टूटी सड़कें खोल रही हैं। फरवरी से अब तक 265 टेंडर आवंटित किए गए। सीईओ ने सात मई को एक सप्ताह में काम शुरू कराने का अल्टीमेटम दिया।
विभागीय कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग तक की चेतावनी दी गई, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी सेक्टरों की सड़कें बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। सेक्टर-11, 12, 22, 27, 34,73, 105 और 73 समेत कई इलाकों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। कहीं डामर उखड़ा पड़ा है, कहीं सड़क धंस चुकी है और कहीं किनारे टूटकर हादसों को न्योता दे रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल तो शहरवासी यह उठा रहे हैं कि जब टेंडर आवंटित हो चुके हैं तो आखिर काम रुका क्यों है और क्या प्राधिकरण ठेकेदारों के सामने बेबस हो चुका है। शहरवासी अब यही सवाल उठा रहे हैं। विभाग बिटुमिन की बढ़ती कीमतों का बहाना बना रहा है, लेकिन जनता पूछ रही है कि इसका खामियाजा आखिर आम आदमी क्यों भुगते। ऐसे में सेक्टरों के लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं पर केवल मिल रहा आश्वासन। सड़कों की बदहाली पर किसी को तरस तक नहीं आ रहा।
सेक्टर-12 और 22 की आंतरिक सड़कों पर दोपहिया वाहन चालक हर दिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सेक्टर-73 में टूटी सड़कों ऊपर से जलभराव ने लोगों की परेशानी दोगुनी कर दी है। हालत यह है कि कई जगह गड्ढों में पानी भरने लगा है और मानसून आने से पहले ही सड़कें जवाब दे चुकी हैं।
वहीं सेक्टर 99 की सड़कें खासतौर पर ए ब्लाक की सड़क तो सीधे हादसों को बुलावा दे रही हैं। केवल यहीं नहीं सेक्टर 105 में भी अधिकतर सड़कें अंदर को धंसी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल करोड़ों रुपये सड़क मरम्मत के नाम पर खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन जमीन पर सिर्फ गड्ढे बढ़ते नजर आते हैं। अधिकारी बैठकों में सख्ती दिखाते हैं, मगर ठेकेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। निवासियों का कहना है यदि यही हाल रहा तो मानसून में नोएडा की सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगी।