जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से छोटे दुकानदारों और रोजगार पर असर, व्यापारी सुरक्षा फोरम संस्थान ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा पत्र
व्यापारी सुरक्षा फोरम संस्थान (VSFS) के पदाधिकारियों ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों के कारण छोटे दुकानदारों और रोजगार से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संस्थान ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित किया।

वंदे न्यूज़ नोएडा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों को लेकर व्यापारी वर्ग ने छोटे दुकानदारों और रोजगार से जुड़े लोगों की समस्याओं पर चिंता जताई है। व्यापारी सुरक्षा फोरम संस्थान के राष्ट्रीय संयोजक अशोक गोयल ने कहा कि लगातार प्रदर्शनों के कारण छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और रोजाना काम करके आजीविका चलाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अशोक गोयल के मुताबिक, किसी भी लोकतंत्र में अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों और रोजगार पर निर्भर लोगों की समस्याओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के कारण होने वाली परेशानियों का असर उन लोगों पर भी पड़ता है, जिनका किसी राजनीतिक विवाद से सीधा संबंध नहीं होता।
सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर उठाया मुद्दा
व्यापारी सुरक्षा फोरम संस्थान की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखे जाने की जानकारी दी गई है। संस्थान का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के कारण छोटे दुकानदारों और रोजगार से जुड़े लोगों को हो रही समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
अशोक गोयल ने व्यापारिक गतिविधियों और आम लोगों की आजीविका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सभी पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। व्यापारियों की चिंता है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्पन्न होने वाली बाधाओं से छोटे कारोबारियों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
व्यापारियों ने की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील
संस्थान ने इस मुद्दे के जरिए प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का ध्यान छोटे दुकानदारों की परेशानियों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की है। व्यापारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि आम लोगों के कामकाज और रोजगार पर अनावश्यक असर न पड़े।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट को लिखे गए पत्र पर किसी आधिकारिक आदेश या कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इस मामले में आगे की स्थिति संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया और न्यायालय की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।