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'अगर हर नागरिक पत्रकार बन जाए, तो इससे सभी के लिए मुश्किलें पैदा होंगी', सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

दिल्ली में 10-11 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिरासत के मामलों पर सुनवाई; कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब।

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||2 min read|Updated 21 hours ago
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'अगर हर नागरिक पत्रकार बन जाए, तो इससे सभी के लिए मुश्किलें पैदा होंगी', सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

वंदे न्यूज़ नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 10 और 11 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार, मारपीट और हिरासत से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। अदालत ने महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट के आरोपों को गंभीर बताया। साथ ही, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से इन मामलों पर जवाब मांगा।


मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत कोई भी व्यक्ति खुद को पत्रकार बता सकता है। ऐसे में मान्यता प्राप्त पत्रकारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले अन्य लोगों के बीच अंतर करना और पत्रकारों को सुरक्षा देना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।


महिला पत्रकार से कथित मारपीट का मामला

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने एक महिला पत्रकार के साथ पुरुष पुलिसकर्मी द्वारा कथित मारपीट का मामला अदालत के सामने रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि पत्रकारों की शिकायतों की जांच के लिए पूर्व महिला न्यायाधीशों और पूर्व आईपीएस अधिकारियों की एक समिति बनाई जानी चाहिए।


इस पर अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से संबंधित महिला पत्रकार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने को कहा। पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मामले में सुनवाई याचिका में बताई गई पीड़िता तक ही सीमित रहेगी।


पत्रकार होने के दावे पर अदालत में चर्चा

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा कि आज मोबाइल फोन रखने वाला कोई भी व्यक्ति खुद को पत्रकार बता सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग पत्रकारिता के नाम पर सोशल मीडिया के लिए रील बनाते हैं।

इस पर इंदिरा जयसिंह ने कहा कि स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करने के अधिकार को भी महत्व दिया जाना चाहिए। इस तरह सुनवाई में पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पत्रकारों की पहचान से जुड़े सवालों पर चर्चा हुई।


केंद्र और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों, वकीलों और प्रदर्शनकारियों पर कथित हमलों से जुड़ी याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने पुलिस द्वारा कथित तौर पर जब्त किए गए कैमरा उपकरण लौटाने की मांग पर भी ध्यान दिया।

इस मामले में पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान इन याचिकाओं पर विचार किया जाएगा।

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