सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद खत्म किया अनशन, केंद्र ने तीन मांगों पर दिया लिखित आश्वासन
सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद नीट पेपर लीक को लेकर अपना अनशन समाप्त किया। केंद्र सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया, जबकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सहमति नहीं बनी।

वंदे न्यूज़ संवाददाता,नई दिल्ली : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर 26 दिनों से जारी अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई सहमति नहीं बनी।
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो संदेश में बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बातचीत के बाद सरकार ने तीन अहम मुद्दों पर लिखित भरोसा दिया, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
प्रदर्शनकारियों पर नहीं होगी कार्रवाई
वांगचुक के अनुसार, सरकार ने आश्वासन दिया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के साथ-साथ 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। साथ ही उनके विरुद्ध किसी प्रकार की कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई भी नहीं होगी।
मृत छात्रों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा
उन्होंने बताया कि कथित नीट पेपर लीक प्रकरण से जुड़े जिन 20 से अधिक छात्रों की मौत हुई है, उनके परिवारों को उचित मुआवजा देने पर भी सरकार ने लिखित सहमति दी है। वांगचुक ने इसे आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
संसद में होगी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर चर्चा
सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार ने संसद में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराने का भी लिखित आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और जिम्मेदारी तय करना होगा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नहीं बनी बात
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान रखी गई उनकी तीन सबसे महत्वपूर्ण मांगों पर लिखित सहमति मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उनकी आवाज आगे भी जारी रहेगी।
