भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की बड़ी छलांग, स्काईरूट का 'विक्रम-1' ऑर्बिटल रॉकेट सफल लॉन्च
स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा से भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। 'मिशन आगमन' के तहत रॉकेट 450 किमी की लो अर्थ ऑर्बिट में पेलोड स्थापित करेगा।

वंदे न्यूज़ संवाददाता, हैदराबाद : भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार को अपना पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च कर इतिहास रच दिया। आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए इस मिशन को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया।
रॉकेट का प्रक्षेपण पहले सुबह 11:30 बजे निर्धारित था, लेकिन अंतिम समय में तकनीकी समीक्षा के चलते काउंटडाउन कुछ देर के लिए रोक दिया गया। बाद में मौसम और नेविगेशन संबंधी परिस्थितियां अनुकूल होने पर दोपहर 12:05 बजे रॉकेट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की ओर रवाना किया गया।
भारत के स्पेस सेक्टर के लिए अहम उपलब्धि
विक्रम-1 की लॉन्चिंग को देश के उभरते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
450 किलोमीटर की कक्षा में पहुंचेंगे पेलोड
मिशन के तहत रॉकेट लगभग 16 मिनट की उड़ान के बाद अपने साथ ले जाए गए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पेलोड को करीब 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करेगा। यह वही कक्षा है, जहां संचार, मौसम और पृथ्वी अवलोकन से जुड़े कई उपग्रह संचालित होते हैं।
आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ विक्रम-1
विक्रम-1 को पूरी तरह कार्बन-कंपोजिट संरचना के साथ तैयार किया गया है। पारंपरिक धातुओं की तुलना में कार्बन फाइबर अधिक हल्का होने के कारण रॉकेट का कुल वजन कम हुआ है और ईंधन की खपत भी अधिक प्रभावी बनी है।
रॉकेट में तीन सॉलिड प्रोपल्शन स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है। शुरुआती तीन चरण रॉकेट को अंतरिक्ष तक पहुंचाते हैं, जबकि अंतिम लिक्विड मॉड्यूल उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करने का कार्य करता है।
कई तकनीकी पेलोड के साथ कला का भी अनूठा संगम
मिशन आगमन केवल तकनीकी उपलब्धि तक सीमित नहीं है। रॉकेट अपने साथ कई भारतीय और विदेशी संस्थानों के अनुसंधान पेलोड भी लेकर गया है। इनमें ग्रह स्पेस, कॉस्मोसर्व स्पेस, डीक्यूब्ड और स्काईरूट का इन-हाउस 'स्कोप' पेलोड शामिल हैं।इसके अलावा अंतरिक्ष में 18 कैरेट सोने से बनी 'कॉस्मिक ब्लूम' माइक्रो आर्ट कलाकृति भी भेजी गई है। इस कलाकृति पर भारत के महान वैज्ञानिक सर सी.वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म आकृतियां उकेरी गई हैं।
विक्रम-S के बाद अगला बड़ा कदम
स्काईरूट एयरोस्पेस ने वर्ष 2022 में विक्रम-S नामक सब-ऑर्बिटल रॉकेट का सफल परीक्षण किया था, जिसने लगभग 89.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरी थी। अब विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग के साथ कंपनी ने भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम को ऑर्बिटल मिशन के स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।