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राहुल-प्रियंका गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, CEC के खिलाफ याचिका दाखिल करेंगे

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च किया। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दाखिल कर चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठाना चाहता है।

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||2 min read|Updated 11 hours ago
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राहुल-प्रियंका गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, CEC के खिलाफ याचिका दाखिल करेंगे

वंदे न्यूज़ नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च किया। विपक्षी दलों का यह मार्च चुनाव आयोग के कामकाज और कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में आयोजित किया गया।


जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के 10 से 15 लोगों के प्रतिनिधिमंडल को परिसर के अंदर फाइलिंग काउंटर तक जाने की अनुमति दी। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल को अपनी याचिका दाखिल करने के लिए हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र के बाहर ही रहने की बात कही गई। विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी शिकायतों को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उठाना चाहते हैं।


मार्च से पहले राहुल गांधी ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान करते हुए इसे लोकतंत्र और न्याय की लड़ाई बताया। उनके साथ प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के अन्य नेता भी मौजूद रहे। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।


इससे पहले विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से मुलाकात का अनुरोध किया था। हालांकि, CJI ने प्रतिनिधिमंडल से मिलने में असमर्थता जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में मिला पत्र का जवाब दिया जा चुका है और मिलने में असमर्थता के कारण भी बताए गए हैं।


मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी भारतीय नागरिकों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति कानूनी राहत के लिए अदालत का रुख कर सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि याचिकाओं पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।


INDIA गठबंधन का यह मार्च चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी निष्पक्षता को लेकर विपक्ष की चिंताओं को सामने लाने की कोशिश है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रतिनिधिमंडल की याचिका में क्या मांगें रखी जाती हैं और अदालत इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।

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