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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: 5 लाख में खरीदा गया था केमिस्ट्री का पेपर, CBI का दावा; कोर्ट में जमानत का किया विरोध

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा दावा। 5 लाख रुपये में केमिस्ट्री का पेपर खरीदा गया। राउज एवेन्यू कोर्ट में जमानत याचिकाओं का विरोध।

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||3 min read|Updated 1 month ago
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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: 5 लाख में खरीदा गया था केमिस्ट्री का पेपर, CBI का दावा; कोर्ट में जमानत का किया विरोध

वंदे न्यूज़ संवाददाता,नई दिल्ली: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि लातूर स्थित आरसीसी क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पेपर सेटर प्रह्लाद कुलकर्णी को 5 लाख रुपये देकर रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) का प्रश्नपत्र खरीदा था। एजेंसी ने राउज एवेन्यू स्थित विशेष CBI अदालत में दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया।


CBI के अनुसार, यह सिर्फ पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि ऐसा संगठित अपराध है जिसने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित किया और लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।


23 अप्रैल को ही मिल गया था पेपर


जांच एजेंसी ने अदालत में बताया कि शिवराज मोटेगांवकर को 23 अप्रैल 2026 को ही केमिस्ट्री के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध करा दिए गए थे। CBI का दावा है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र उसके मोबाइल फोन से भी बरामद किया गया है, जो जांच का अहम साक्ष्य है।


छात्रों से कहा था- यही सवाल परीक्षा में आएंगे


विशेष लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसी के पास एक वीडियो मौजूद है, जिसमें शिवराज मोटेगांवकर छात्रों से यह कहते हुए दिखाई दे रहा है कि उसने जो प्रश्न दिए हैं, वही वास्तविक नीट परीक्षा में पूछे जाएंगे। CBI का कहना है कि यह वीडियो आरोपी की साजिश में सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।


डॉ. मनोज शिरुरे की जमानत का भी विरोध


CBI ने डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे की जमानत याचिका का भी विरोध करते हुए कहा कि यह अपराध पूरे देश के खिलाफ है। एजेंसी के अनुसार, पेपर लीक के चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिससे देश और विदेश में परीक्षा देने वाले लाखों अभ्यर्थियों को परेशानी हुई।


CBI ने अदालत में यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम से सरकारी खजाने को करीब 600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एजेंसी ने यह भी कहा कि विवाद के बाद कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली।


बहन के खाते में ट्रांसफर की गई रकम


जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि डॉ. मनोज शिरुरे ने इस मामले से जुड़ी रकम अपनी बहन के बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। CBI का तर्क है कि यदि धन वैध होता तो उसे दूसरे खाते में भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ती। एजेंसी ने कहा कि चैट रिकॉर्ड और गवाहों के बयान भी शिरुरे की भूमिका की पुष्टि करते हैं।साथ ही CBI ने अदालत को बताया कि शिरुरे की पत्नी भी डॉक्टर हैं और अस्पताल का संचालन करती हैं, इसलिए स्वास्थ्य या आजीविका के आधार पर राहत देने का कोई औचित्य नहीं बनता।


बचाव पक्ष ने क्या कहा?


बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि डॉ. शिरुरे के खिलाफ आरोप केवल सह-आरोपी प्रह्लाद कुलकर्णी के बयान पर आधारित हैं। उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं है और उनके फरार होने की भी कोई संभावना नहीं है।


22 जुलाई को आएगा फैसला


विशेष CBI न्यायाधीश अजय गुप्ता ने डॉ. मनोज शिरुरे की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर 22 जुलाई के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं शिवराज मोटेगांवकर की जमानत याचिका पर CBI अपना जवाब दाखिल कर चुकी है।


13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ी


इसी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 24 जुलाई तक बढ़ा दी है। इनमें शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस शाह, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, मांगीलाल बिवाल, यश यादव, डॉ. मनोज शिरुरे, धनंजय लोखंडे, शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं।


CBI ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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