NEET-UG 2026 पेपर लीक: NTA के 3 एक्सपर्ट पर आरोप, रफ शीट पर लिखे थे 135 सवाल; CBI चार्जशीट में बड़े खुलासे
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि NTA के तीन एक्सपर्ट ने रफ शीट पर 135 सवाल लिखकर पेपर लीक किया।

नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के तीन विषय विशेषज्ञ प्रश्नपत्र लीक मामले के कथित प्राथमिक स्रोत थे। आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने प्रश्न तैयार करने और अनुवाद प्रक्रिया के दौरान गोपनीय सामग्री बाहर निकाली और उसे बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचाया।
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, यदि आरोप साबित होते हैं तो आरोपितों को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
डिजिटल फोरेंसिक से जुड़ी पेपर लीक की कड़ी
जांच में डिजिटल फोरेंसिक को अहम आधार बनाया गया है। CBI ने NTA विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी से जुड़े कई डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की है।
जांच एजेंसी ने पुणे स्थित उनकी सोसायटी के एक्सेस-कंट्रोल ऐप रिकॉर्ड, छात्रों की एंट्री से जुड़े बायोमेट्रिक डेटा, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन डेटा का विश्लेषण किया। इन जानकारियों के जरिए परीक्षा से पहले छात्रों और उनके अभिभावकों की गतिविधियों को ट्रैक किया गया।
CBI का दावा है कि डिजिटल ट्रेल के जरिए विशेष कक्षाओं और कथित पेपर लीक नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच में मदद मिली।
तीन NTA विशेषज्ञों पर लगा आरोप
CBI के अनुसार, NTA के विषय विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी, मनीषा गुरुनाथ मांधरे और मनीषा संजय हवलदार प्रश्नपत्र लीक के कथित प्राथमिक स्रोत थे।
आरोप है कि इन लोगों ने प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद की प्रक्रिया के दौरान गोपनीय परीक्षा सामग्री तक पहुंच बनाई और उसे बाहर निकाला।
रफ शीट पर लिखे गए थे 135 सवाल
चार्जशीट में दावा किया गया है कि केमिस्ट्री विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी ने प्रश्नपत्र तैयार करने के दौरान मिले रफ वर्क पेपर का इस्तेमाल किया।आरोप के मुताबिक, उन्होंने केमिस्ट्री के 135 सवाल और उनके विकल्प छोटे-छोटे कागजों पर लिखे और कथित तौर पर उन्हें गोपनीय परिसर से बाहर ले गए।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ सवालों को उन्होंने याद किया और बाद में होटल पहुंचकर उन्हें दोबारा लिखा।
जांच में जुटाए गए डिजिटल और तकनीकी सबूत
CBI ने मामले में डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, प्रवेश रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सबूतों को आधार बनाया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सबूतों से कथित पेपर लीक की पूरी कड़ी को जोड़ने में मदद मिली।
फिलहाल मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।