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NEET पेपर लीक: पार्ट-टाइम टीचर से 1500 करोड़ रुपये का मालिक बना शिवराज, CBI जांच में खुलासा

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||4 min read|Updated 1 week ago
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NEET पेपर लीक: पार्ट-टाइम टीचर से 1500 करोड़ रुपये का मालिक बना शिवराज, CBI जांच में खुलासा

CBI की जांच में NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़े खुलासे हुए हैं, जिसमें लातूर के रेनुकाई करियर सेंटर के संचालक शिवराज मोटेगांवकर का 1500 करोड़ का नेटवर्क सामने आया है।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच के दौरान कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को ऐसे संकेत मिले हैं कि पिछले साल भी NEET का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले महाराष्ट्र के लातूर स्थित रेनुकाई करियर सेंटर (RCC) तक पहुंच गया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के कथित पेपर लीक नेटवर्क से पुराने संबंध रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उसकी कुल संपत्ति करीब 1500 करोड़ रुपए बताई जा रही है।


पता चला है कि RCC से पढ़ने वाले कई छात्रों ने NEET 2025 में बड़ी सफलता हासिल की थी। कुल 19 छात्रों का चयन विभिन्न AIIMS संस्थानों में हुआ। इनमें दो छात्रों का AIIMS दिल्ली, पांच का AIIMS हैदराबाद और तीन-तीन छात्रों का AIIMS भोपाल और वाराणसी में चयन हुआ।


अमीर और अच्छे छात्रों को बनाया जाता था निशाना

सूत्रों के अनुसार शिवराज मोटेगांवकर ऐसे छात्रों को चुनता था जो आर्थिक रूप से मजबूत हों और पढ़ाई में औसत से बेहतर हों। परिवारों से कथित डील के बाद इन छात्रों को नियमित बैच में शामिल किया जाता था।

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बताया जा रहा है कि परीक्षा से पहले अंतिम 15 दिनों में इन छात्रों के लिए 'वन-ऑन-वन मेंटरिंग' कराई जाती थी। आरोप है कि पेपर मिलते ही छात्रों को सवाल और जवाब याद करवाए जाते थे। CBI को इस प्रक्रिया से जुड़े कुछ वीडियो भी मिले हैं। जांच एजेंसी के अनुसार मोटेगांवकर कई वर्षों से पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे के जरिए प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और मनीषा मांढरे के संपर्क में था।


15 लाख रुपए में पेपर बेचने का शक

CBI की जांच में सामने आया है कि गुरुग्राम के यश यादव ने जयपुर के विकास बिवाल को NEET का पेपर बेचा था। उसे यह पेपर नासिक के शुभम खैरनार से मिला था। 19 मई को CBI ने नागपुर के सेंट्रल एवेन्यू और इतवारी इलाके में दो छात्रों के घरों पर छापेमारी की। वहां से मोबाइल फोन, लैपटॉप, हस्तलिखित नोट्स और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। दोनों छात्रों ने इस साल NEET परीक्षा दी थी।

CBI को शक है कि पुणे नेटवर्क के जरिए प्रति छात्र करीब 15 लाख रुपए लेकर लीक पेपर बेचा गया। जांच एजेंसी को छात्रों के मनीषा वाघमारे और केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी से संपर्क के संकेत मिले हैं।


री-एग्जाम को फुलप्रूफ बनाने के निर्देश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को NEET री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 21 जून को होने वाली परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और फुलप्रूफ तरीके से कराई जाए। उन्होंने कहा कि पिछली परीक्षा में जो भी खामियां सामने आईं, उन्हें पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए ताकि छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।

इस बीच शिवराज मोटेगांवकर का एक वीडियो भी वायरल हुआ है। वीडियो में वह अपनी कोचिंग की छात्राओं से परीक्षा को लेकर बातचीत करता दिखाई दे रहा है। एक छात्रा वीडियो में कहती सुनाई देती है कि 'मॉक टेस्ट वाले सभी सवाल एग्जाम में आए थे।'


CBI को नए नामों की तलाश

जांच में अब विवेक पाटिल नाम का नया व्यक्ति भी सामने आया है। CBI को शक है कि शिवराज की गैंग ने उसे भी लीक पेपर उपलब्ध कराया था। जांच एजेंसी बड़े कोचिंग माफिया और NTA के कुछ अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की भी जांच कर रही है।

CBI उन लोगों की भी तलाश में जुटी है जिन्हें लिखित प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी उपलब्ध कराई गई थी। यह भी जानकारी सामने आई है कि पुणे से गिरफ्तार केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी पहले शिवराज की कोचिंग RCC में पढ़ा चुका है।


3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद

NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी मिली थी।

इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। लगातार सामने आ रहे खुलासों के बाद 12 मई को परीक्षा रद कर दी गई और री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया।

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