MP के 1,900 सरकारी स्कूलों में नहीं हैं शिक्षक, CAG रिपोर्ट पर हाई कोर्ट सख्त; राज्य सरकार से मांगा जवाब
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने CAG रिपोर्ट के आधार पर दायर याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। कोर्ट ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

वंदे न्यूज़ संवाददाता , भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि राज्य के करीब 1,900 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
CAG रिपोर्ट के आधार पर दायर हुई याचिका
यह जनहित याचिका अधिवक्ता सौरभ त्रिपाठी ने दायर की है। याचिका का आधार नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट है, जिसमें वर्ष 2018 से मार्च 2023 के बीच राज्य के 66,814 सरकारी स्कूलों का आकलन किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, 1,895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं था, जबकि इनमें से 1,379 स्कूलों में छात्र नियमित रूप से नामांकित थे।
शिक्षकों की तैनाती में भी अनियमितता का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि शिक्षकों की नियुक्ति और तैनाती में गंभीर असंतुलन है। कई ऐसे स्कूल हैं जहां छात्र नहीं हैं, लेकिन शिक्षक तैनात हैं। वहीं कुछ स्कूलों में स्वीकृत पद न होने के बावजूद शिक्षकों की पोस्टिंग की गई है।
इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया है कि शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों को अन्य विभागों में कार्यरत रखा गया, जबकि उनका वेतन स्कूल शिक्षा विभाग से ही जारी होता रहा।
शिक्षा के अधिकार के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के तहत बच्चों को मिले शिक्षा के अधिकार (Right to Education) का उल्लंघन बताया है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, वहां निर्धारित समय सीमा के भीतर नियुक्तियां की जाएं। साथ ही, शिक्षकों की तैनाती की पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की भी मांग की गई है।
चार सप्ताह में देना होगा जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में सरकार को स्कूलों में शिक्षकों की कमी और नियुक्ति व्यवस्था पर अपना पक्ष रखना होगा।
