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पश्चिम बंगाल एसआईआर: 38 लाख अपीलों में अबतक सिर्फ 1 लाख का निपटारा, चुनाव आयोग ने SC को दी जानकारी

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने के खिलाफ 37 लाख से अधिक अपीलें अभी भी लंबित हैं।

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||3 min read|Updated 3 weeks ago
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पश्चिम बंगाल एसआईआर: 38 लाख अपीलों में अबतक सिर्फ 1 लाख का निपटारा, चुनाव आयोग ने SC को दी जानकारी

वंदे न्यूज़ नई दिल्ली चुनाव आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने के खिलाफ दायर 37 लाख से अधिक अपीलें अभी भी लंबित हैं।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि 38.20 लाख अपीलों में से अब तक करीब 1.02 लाख मामलों का ही निपटारा हुआ है।


यह जवाब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष दाखिल किया गया। पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग से जवाब मांगा था, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हटाए गए मतदाताओं के दावों और आपत्तियों का विधानसभा क्षेत्रवार डेटा सार्वजनिक करने की मांग की गई थी।


37.18 लाख मामले अभी भी बाकी

चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची के एसआईआर से संबंधित आदेशों के खिलाफ कुल 38,20,683 अपीलें दायर की गई थीं। इनमें से केवल 1,02,231 अपीलों का ही निपटारा हो सका है, जबकि 37,18,452 अपीलें अभी भी लंबित हैं।


हालांकि, आयोग के हलफनामे में यह अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया कि इनमें से कितनी अपीलें नाम हटाए जाने के खिलाफ थीं और कितनी अपीलें सूची में नए नाम शामिल किए जाने के विरोध में दर्ज की गई थीं।


58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम बाहर होने का दावा

हलफनामा दायर करने वाले प्रसेनजीत बोस ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के गणना चरण के दौरान 58 लाख से अधिक मतदाताओं को बाहर कर दिया गया था।


उन्होंने बताया कि दावे और आपत्तियों के चरण में नाम शामिल करने के लिए 9.64 लाख आवेदन और नाम हटाने के लिए 99,000 से अधिक आवेदन मिले थे। इसके बावजूद, 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में केवल 1.82 लाख नए नाम ही जोड़े गए।


आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 17 दिसंबर 2025 ड्राफ्ट से 7 अगस्त 2026 के बीच फॉर्म 6 के तहत 34.13 लाख नए आवेदन प्राप्त हुए थे।


व्यवस्था दुरुस्त करने पर जोर

इससे पहले 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को न्यायाधिकरणों के समक्ष अपीलों के लंबित रहने और उनके निपटारे का पूरा ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि इन अपीलों का फैसला समयबद्ध तरीके से होना आवश्यक है।

पीठ ने आयोग से यह भी पूछा था कि लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और इसके लिए कितने अतिरिक्त न्यायाधिकरणों की जरूरत है।

इसके अतिरिक्त, शीर्ष अदालत ने 24 अप्रैल को अपीलीय न्यायाधिकरणों को यह भी निर्देश दिया था कि जिन लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की अर्जी दी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए।


700 न्यायिक अधिकारियों और 19 न्यायाधिकरणों की तैनाती

लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों के त्वरित निस्तारण के लिए पश्चिम बंगाल के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड से करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।

बाद में शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार, कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने इन अपीलों की सुनवाई और निर्णय के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरणों का गठन किया था।


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